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| 082 |
_b34817 _a550 न 01 |
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| 100 | _aक्षीरसागर क.कृ. | ||
| 245 | _aनाते निसर्गाशी-माती जगली तर आपण जगू. | ||
| 260 |
_bअनिकेत प्रकाशन, पुणे. _c2001 |
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| 300 |
_a15 _bमयुरेष बुक एजन्सी,कराड |
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| 365 | _b12 | ||
| 520 | _aविज्ञान-भौमिक शास्त्रे. | ||
| 630 | _aनाते निसर्गाशी-माती जगली तर आपण जगू. | ||
| 650 | _aविज्ञान-भौमिक शास्त्रे. | ||
| 730 | _aनाते निसर्गाशी-माती जगली तर आपण जगू. | ||
| 942 | _cBOOK | ||
| 999 |
_c783930 _d783927 |
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